आरटीई एक्ट लागू कराने के लिये सरकार को करनी होगी सार्थक पहल - सीमा त्यागी

हमारा भारत एक लोकतांत्रिक देश है जिसके कारण यह अनिवार्य हो जाता है कि भारत का प्रत्येक नागरिक शिक्षित हो और ऐसा होने के लिये यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि शिक्षा सार्वभौमिक अर्थात सर्वव्याप्त हो इस व्यवस्था को पूर्ण करने के लिये राइट टू एजुकेशन का गहरा महत्व है। देश मे बच्चो को मुफ्त एवम अनिवार्य शिक्षा देने के लिए राइट टू एजुकेशन एक्ट 2009 ( आरटीई ) लाया गया था इस आरटीई अधिनियम की विशेषता है कि यह भारत के प्रत्येक राज्य के 6 से 14 वर्ष तक कि आयु के बच्चों को मुफ्त शिक्षा की गारंटी देता है 4 अगस्त 2009 को भारत की संसद ने इस एक्ट को अमली जामा पहनाया और 1 अप्रैल 2010 को इसे लागू कर दिया गया। इस एक्ट ने कागजी रूप से तो 135 देशों की लाइन में लाकर खड़ा कर दिया जिनके पास शिक्षा का मौलिक अधिकार है लेकिन हम धतातल पर बात करे तो इस राइट टू एजुकेशन एक्ट को बने लगभग 13 वर्ष से भी ज़्यादा का समय बीत गया है, उसके बाद भी यह महत्त्वपूर्ण एक्ट सभी राज्यो में प्रभावशाली रूप से लागू होने की राह देख रहा है। इस एक्ट को लागू करने में केंद्र और राज्य सरकारो की कोई विशेष रुचि नही है।जिसके कारण देश के प्रत्येक राज्य में लाखों गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर बच्चे शिक्षा के मौलिक अधिकार से वंचित हो रहे है। आरटीई अधिनियम 2009 की धारा 12( 1) ग राज्यो के प्रत्येक मान्यता प्राप्त निजी स्कूल में 25 % निर्धारित सीटो पर गरीब एवम आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को निःशुल्क एवम अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने की व्यवस्था करता है जो इस अधिनियम के अंतर्गत निहित बच्चों को निःशुल्क शिक्षा प्रदान करने की शक्तियों को दिखाता है लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि निजी स्कूलों के बढ़ते प्रभाव , सरकार की उदासीनता और अधिकारियों की लाचारी के चलते इस अधिनियम का लाभ गरीब बच्चों को नही मिल रहा है।

 हमारे देश के बड़े बड़े नेता जब मंचो से "बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ" और  शिक्षा की बात करते है तो ऐसा प्रतीत होता है कि ये गरीब और आम जनता को शिक्षा मुहिया कराने के प्रति बेहद संवेदनशील है लेकिन जब हम वास्तविकता में देखते है तो यह लगभग शून्य नजर आती है। उसके बाद भी हम अपने प्रदेश के मुख्यमंत्री जी से यह उम्मीद करते है कि राइट टू एजुकेशन एक्ट को प्रदेश में प्रभावी रूप से लागू करा लाखो गरीब बच्चों को शिक्षा का अधिकार दिलायेंगे। अगर हमारे यशस्वी मुख्यमंत्री प्रदेश के गरीब बच्चों को शिक्षा प्रदान करने के लिए बने राइट टू एजुकेशन एक्ट को लागू करने में गंभीरता दिखाए तो प्रत्येक बच्चे को शिक्षा मुहिया कराने में उत्तर प्रदेश भारत का पहला राज्य बन सकता है हम उम्मीद करेगे की मुख्यमंत्री जी इस ओर सार्थक कदम उठाएंगे।

श्रीमती सीमा त्यागी

अध्यक्षा

गाज़ियाबाद पेरेंट्स एसोसिएशन