जब जिला सूचना अधिकारी ने पत्रकारों के जिलाधिकारी से विवाद में पत्रकारों का साथ दिया

       

(सुशील कुमार शर्मा,स्वतंत्र पत्रकार)

गाजियाबाद। दिवंगत उप सूचना निदेशक  नवीन चन्द्र गाजियाबाद में 1979 से 1986 तक जिला  सूचना अधिकारी रहे थे। नवीन चन्द्र ऐसे अधिकारी रहे हैं और जिनकी विभाग में साख का इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि गाजियाबाद से जब वह पदोन्नति के बाद उप सूचना निदेशक  होकर मेरठ मंडल  गये  थे तो एक समय वह अविभाजित आधे उ.प्र.( तब उत्तराखंड नहीं बना था) के तीन मंडलों मेरठ, आगरा व कुमायूं  के एक साथ उप  सूचना निदेशक रहे थे। गाजियाबाद में जिलाधिकारी रहे ए. के. जैन , चन्द्र पाल,ओम पाठक, टी. जार्ज जोसफ व  नसीम जैदी  के कार्यकाल में उनकी तैनाती रही। यह चित्र लगभग पांच वर्ष पूर्व तब का है जब मैं (सुशील कुमार शर्मा ) मित्र वरिष्ठ पत्रकार राकेश पाराशर (जो दै.नवभारत टाइम्स के गाजियाबाद ब्यूरो चीफ रहे हैं) तथा प्रख्यात लेखक व वरिष्ठ पत्रकार विनय संकोची के साथ नवीन चन्द्र जी से मिलने उनके वैशाली,मेरठ स्थित आवास गये थे। 85 वर्षीय नवीन चन्द्र जी व भाभी श्रीमती सुशीला जी हमें देखकर  बहुत प्रसन्न हुए थे। उन दिनों उनके कई माह से लगातार मिलने के लिए फोन आ रहे थे। जब हम मिले तो देर तक पुरानी यादों को लेकर चर्चा रही।जब चले तो वह बहुत व्यथित हुए थे। इस मुलाकात के कुछ समय बाद ही उनका अचानक हृदयाघात हो जाने से स्वर्गवास हो गया था।

उल्लेखनीय है नवीन चन्द्र जी ने गाजियाबाद में अपनी तैनाती के दौरान तेजतर्रार जिलाधिकारी रहे चन्द्र पाल से पत्रकारों का विवाद होने पर पत्रकारों का पक्ष लिया था और तब जिलाधिकारी चन्द्र पाल को जिला सूचना कार्यालय ( जो उस समय  कविनगर में था) आकर जिले के तमाम प्रमुख पत्रकारों के समक्ष माफी मांगनी पडी थी। उस समय मेरी सदारत में बनी गाजियाबाद जर्नलिस्ट्स क्लब में पूरे जिले के पत्रकार एकजुट थे ।पत्रकारों ने  गाजियाबाद जर्नलिस्ट्स क्लब के आवाहन पर सरकारी आयोजन और सरकारी विज्ञप्तियों का बहिष्कार कर दिया था। जिलाधिकारी के माफी मांगने के बाद ही बहिष्कार समाप्त किया गया। उस समय  शासन से इस नवसृजित जनपद के लिए विशेष रूप से विकास योजनाओं में धन आ रहा था । जिला प्रशासन द्वारा पत्रकारों को विकास योजनाओं के स्थल निरीक्षण के लिए ले जाया जाता था।साथ में एडीएम स्तर के अधिकारी के साथ सम्बंधित विभागों के अधिकारी होते थे। पत्रकारों की सरकारी विभागों से संबंधित रिपोर्ट जिलाधिकारी नियमित देखते थे तथा संबंधित विभाग के अधिकारियों को भी टिप्पणी कर भेजते थे। जिसूवि  अखबारों की कटिंग शासन को भी भेजता था । मुझे स्मरण है उस समय अगस्त माह शुरू होने वाला था और  कांग्रेस शासन द्वारा पूरे प्रदेश के जिलाधिकारियों को 15 अगस्त स्वाधीनता दिवस को राष्ट्रीय एकता दिवस दिवस के रूप में मनाये जाने के आदेश दिए थे। दैनिक नवभारत टाइम्स में गाजियाबाद के पत्रकारों द्वारा सरकारी खबरों और सरकारी आयोजनों के बहिष्कार की खबर मुख्य पृष्ठ पर छप गयी थी ।उस समय हिन्दी के दो ही प्रमुख अखबार थे दैनिक हिन्दुस्तान और दैनिक नवभारत टाइम्स ।तब अखबारों के एडीशन भी दो ही होते थे।एक जहां से निकल रहा है वह लोकल एडीशन और दूसरा डाक एडीशन।  अन्य दैनिक अखबारों में दैनिक पंजाब केसरी व दैनिक वीर अर्जुन भी थे। परन्तु यह  आरएसएस विचार धारा थे इसलिए  शासन इनकी खबरों को गम्भीरता से नहीं लेता था। राकेश पाराशर की यह खबर दैनिक नवभारत टाइम्स के दोनों एडीशन में छपी थी। अन्य दैनिक समाचार पत्रों में भी थी। जिससे जिलाधिकारी चंद्रपाल घबरा गये।उस समय सांसद वीपी मौर्य थे और विधायक प्यारे लाल शर्मा थे। दोनों कांग्रेस से थे।